रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म कराने में मदद करेगा भारत; टैरिफ तनाव के बीच US सांसद ने जताई उम्मीद
अमेरिका और भारत के बीच चल रहे टैरिफ तनाव के बीच, एक अमेरिकी सांसद ने उम्मीद जताई है कि भारत रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म कराने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति और कूटनीतिक हलकों में नई चर्चाओं को जन्म दिया है।
रूस-यूक्रेन संघर्ष 2022 से जारी है और अब तक लाखों लोगों की जान ले चुका है। अमेरिका और यूरोपीय देश रूस पर लगातार प्रतिबंध लगा रहे हैं, जबकि भारत ने शुरू से ही तटस्थ और संवाद-आधारित रुख अपनाया है।

🌏 अमेरिकी सांसद का बयान
अमेरिकी कांग्रेस के एक वरिष्ठ सदस्य ने मीडिया से बातचीत में कहा:
“भारत के पास दोनों पक्षों — रूस और यूक्रेन — के साथ अच्छे रिश्ते हैं। अगर कोई देश इस संघर्ष को समाप्त कराने में मध्यस्थ की भूमिका निभा सकता है, तो वह भारत है।”
उन्होंने यह भी कहा कि भारत की कूटनीतिक संतुलन नीति और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वैश्विक स्तर पर प्रभाव, शांति वार्ता की राह खोलने में मदद कर सकता है।
📜 भारत की अब तक की भूमिका
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भारत ने संयुक्त राष्ट्र में कई बार संवाद और कूटनीतिक समाधान पर जोर दिया है।
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पीएम मोदी ने 2022 में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात के दौरान कहा था — “आज का युग युद्ध का नहीं है।”
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भारत ने रूस से ऊर्जा और रक्षा खरीद जारी रखी, लेकिन साथ ही यूक्रेन को मानवीय सहायता भी भेजी।
⚖️ टैरिफ विवाद की पृष्ठभूमि
इस बयान का समय इसलिए खास है क्योंकि हाल ही में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 25% टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा है, जिसे लेकर दोनों देशों के बीच व्यापार तनाव बढ़ा है।
हालांकि मौजूदा अमेरिकी प्रशासन और भारतीय सरकार व्यापार मुद्दों को सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन यह विवाद कूटनीतिक माहौल को प्रभावित कर सकता है।
🛡️ क्यों है भारत से उम्मीद?
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रूस के साथ ऐतिहासिक रिश्ते: रक्षा, ऊर्जा और अंतरिक्ष के क्षेत्र में दशकों का सहयोग।
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यूक्रेन के साथ सकारात्मक संबंध: कृषि, शिक्षा और टेक्नोलॉजी में साझेदारी।
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गुटनिरपेक्ष छवि: भारत को एक ऐसे देश के रूप में देखा जाता है जो वैश्विक विवादों में तटस्थ रहकर शांति को बढ़ावा देता है।
📈 विशेषज्ञों की राय
अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार मानते हैं कि भारत की मध्यस्थता तभी सफल होगी जब:
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रूस और यूक्रेन दोनों वास्तविक वार्ता के लिए तैयार हों।
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अमेरिका और यूरोपीय संघ इस पहल को समर्थन दें।
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युद्धविराम के लिए विश्वसनीय निगरानी तंत्र तैयार किया जाए।
🗣️ भारत का आधिकारिक रुख
भारत सरकार ने इस बयान पर सीधी प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन विदेश मंत्रालय ने दोहराया कि भारत शांति, संवाद और कूटनीति के जरिए ही समाधान चाहता है।
अमेरिकी सांसद का यह बयान भारत की बढ़ती वैश्विक कूटनीतिक ताकत का संकेत है। जहां एक ओर टैरिफ विवाद से भारत-अमेरिका संबंधों में तनाव है, वहीं दूसरी ओर रूस-यूक्रेन युद्ध में भारत की मध्यस्थता की उम्मीद, दोनों देशों के बीच सहयोग का नया रास्ता खोल सकती है।
अगर भारत वास्तव में इस संघर्ष को खत्म कराने में अहम भूमिका निभाता है, तो यह उसकी अंतरराष्ट्रीय छवि को नई ऊंचाई पर ले जाएगा।

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