ट्रंप के टैरिफ वार के बीच रूस में डोभाल की मैराथन बैठक, टॉप-3 नेताओं से मिले; क्या हुई बात?
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 25% टैरिफ वार के बीच, भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल रूस के दौरे पर पहुंचे और वहां देश के टॉप-3 नेताओं से मैराथन बैठकें कीं। यह दौरा ऐसे समय हुआ है जब अंतरराष्ट्रीय राजनीति में रूस-यूक्रेन युद्ध, भारत-अमेरिका व्यापार तनाव और वैश्विक कूटनीति के नए समीकरण तेजी से बदल रहे हैं।
इन बैठकों के एजेंडे में रक्षा सहयोग, ऊर्जा सौदे, क्षेत्रीय सुरक्षा और यूक्रेन संघर्ष में भारत की भूमिका जैसे अहम मुद्दे शामिल रहे।
🇷🇺 रूस के टॉप-3 नेताओं से मुलाकात
सूत्रों के मुताबिक, डोभाल ने रूस के:
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राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन
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विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव
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राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुख निकोलाई पेत्रुशेव
से अलग-अलग और संयुक्त बैठकें कीं। इन मुलाकातों में भारत-रूस के रणनीतिक रिश्तों को गहरा करने, रक्षा और ऊर्जा समझौतों को आगे बढ़ाने, और यूक्रेन संकट पर संवाद की संभावनाओं पर चर्चा हुई।
🛡️ रक्षा और रणनीतिक सहयोग
भारत और रूस के बीच दशकों पुराने रक्षा संबंध हैं। इस दौरे में:
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नई रक्षा डील्स पर प्रगति हुई, जिनमें आधुनिक हथियार प्रणालियां और स्पेयर पार्ट्स की आपूर्ति शामिल है।
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मेक इन इंडिया के तहत रूस से तकनीक ट्रांसफर की संभावनाएं भी चर्चा में रहीं।
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नौसेना और वायुसेना के लिए संयुक्त अभ्यास और प्रशिक्षण कार्यक्रमों पर भी जोर दिया गया।
⛽ ऊर्जा सहयोग पर फोकस
रूस से कच्चे तेल और गैस की खरीद में भारत ने पिछले दो सालों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी की है। डोभाल की मुलाकात में:
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दीर्घकालिक ऊर्जा आपूर्ति समझौते पर बातचीत हुई।
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रूस के आर्कटिक और सुदूर पूर्व क्षेत्रों में संयुक्त निवेश के प्रस्ताव रखे गए।
🌏 यूक्रेन युद्ध में भारत की भूमिका
बैठकों में यूक्रेन संघर्ष भी एक बड़ा मुद्दा रहा। रूस ने भारत के तटस्थ रुख की सराहना की, जबकि डोभाल ने युद्ध समाप्त करने के लिए संवाद और कूटनीति पर जोर दिया।
अमेरिकी सांसदों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की हालिया अपील को देखते हुए, भारत अब खुद को संभावित मध्यस्थ के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा है।
⚖️ टैरिफ वार का बैकग्राउंड
डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में भारत पर 25% टैरिफ लगाने की बात कही है, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक तनाव बढ़ा है। इस स्थिति में रूस के साथ बढ़ता सहयोग, भारत के लिए रणनीतिक संतुलन बनाए रखने का तरीका माना जा रहा है।
📢 विशेषज्ञों की राय
अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार मानते हैं कि डोभाल का यह दौरा भारत की मल्टी-अलाइनमेंट नीति का हिस्सा है।
“भारत एक साथ अमेरिका, रूस और यूरोप — सभी के साथ रिश्ते मजबूत रखने की कोशिश कर रहा है। यह बैलेंसिंग एक्ट भविष्य की कूटनीतिक चुनौतियों में मदद करेगा।”
🏁 निष्कर्ष
डोभाल की रूस यात्रा ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखते हुए सभी महाशक्तियों के साथ रिश्ते मजबूत करना चाहता है। टैरिफ वार, यूक्रेन संकट और ऊर्जा सुरक्षा जैसे मुद्दों के बीच यह दौरा भारत की वैश्विक कूटनीतिक सक्रियता का अहम संकेत है।
अब देखने वाली बात होगी कि इन बैठकों के बाद कौन से ठोस समझौते सामने आते हैं और भारत कैसे अमेरिका और रूस के बीच अपने संतुलन को बनाए रखता है।

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