पापा, मुझे पुलिस ने पकड़ लिया है; क्या आपके पास भी आया ऐसा कॉल? वॉइस स्कैम से बचने का तरीका
कल्पना कीजिए: दोपहर का वक्त है। अचानक आपका फोन बजता है। स्क्रीन पर एक अनजान नंबर है। आप फोन उठाते हैं और दूसरी तरफ से रोने-गिड़गिड़ाने की आवाज आती है- पापा, मुझे बचा लीजिए… पुलिस ने मुझे पकड़ लिया है… मैंने कुछ नहीं किया…
आवाज हूबहू आपके बेटे या बेटी की है। वही टोन, वही डर, वही पुकार। आपके पैरों तले जमीन खिसक जाती है। इसके बाद एक ‘पुलिस वाला’ फोन लेता है और कहता है कि आपके बच्चे को ड्रग्स या किसी एक्सीडेंट के मामले में पकड़ा गया है, और अगर तुरंत पैसे ट्रांसफर नहीं किए, तो FIR दर्ज हो जाएगी।
घबराहट में आप पैसे भेज देते हैं। लेकिन बाद में पता चलता है कि आपका बच्चा तो कॉलेज या ऑफिस में मजे से बैठा है। उसे तो पता भी नहीं कि उसके साथ क्या हुआ।
यह कोई फिल्म की कहानी नहीं, बल्कि ‘AI वॉयस स्कैम’ (AI Voice Scam) की नई और खौफनाक हकीकत है। आइए, इसे समझते हैं कि यह कैसे काम करता है और आप इससे कैसे बच सकते हैं।
सबसे बड़ा सवाल– स्कैमर्स के पास आपके बच्चे की आवाज आई कहां से? क्या उन्होंने रिकॉर्डिंग की थी? नहीं, उन्होंने ‘वॉयस क्लोनिंग’ (Voice Cloning) का इस्तेमाल किया।
वॉयस क्लोनिंग एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक है। जैसे किसी की फोटो देखकर स्कैच बनाया जा सकता है, वैसे ही AI किसी की आवाज सुनकर उसे ‘कॉपी’ कर सकता है।
सोर्स क्या है? हम और आप। हम सोशल मीडिया (Instagram Reels, Facebook Stories, YouTube) पर अपनी और बच्चों की वीडियो डालते हैं।
कितना समय लगता है? आज की एडवांस AI को किसी की आवाज कॉपी करने के लिए सिर्फ 3 से 10 सेकंड का ऑडियो चाहिए।
नतीजा: स्कैमर उस AI टूल में कुछ भी टाइप करता है (जैसे: पापा बचाओ), और वह टूल उसी आवाज में बोलकर सुना देता है जो उसने आपके वीडियो से सीखी थी। यह इतना असली लगता है कि खुद मां-बाप भी धोखा खा जाते हैं।
ठगी का तरीका: ‘डर’ का व्यापार
साइबर अपराधी जानते हैं कि इंसान का दिमाग ‘डर’ की स्थिति में काम करना बंद कर देता है। वे आपको सोचने का वक्त नहीं देते। वे फोन पर पीछे सायरन, थाने का शोर या वायरलेस की आवाजें चलाते हैं ताकि माहौल असली लगे। ‘सिर्फ 10 मिनट हैं, वरना जेल हो जाएगी।’ यह हड़बड़ी आपको अपने बच्चे को कॉल करके वेरिफाई करने से रोकती है।
‘सेफ वर्ड’: आपका सबसे बड़ा हथियार
इस हाई-टेक धोखे से बचने का एक बहुत ही पुराना और कारगर तरीका है- फैमिली पासवर्ड या ‘सेफ वर्ड’। यह जासूसी फिल्मों जैसा लग सकता है, लेकिन आज के दौर में यह हर परिवार की जरूरत है।
‘सेफ वर्ड’ क्या है? यह एक ऐसा गुप्त शब्द है जो सिर्फ आपके और आपके परिवार के सदस्यों को पता हो। यह कोई भी रैंडम शब्द हो सकता है जिसका पुलिस या मुसीबत से कोई लेना-देना न हो।
उदाहरण: फेवरेट हीरो, शहर व्यक्ति, गाजर का हलवा, नीला आसमान, या सुपरमैन… कुछ भी हो सकता है।
इसका इस्तेमाल कैसे करें?
आज ही अपने परिवार (खासकर बच्चों और बुजुर्गों) के साथ बैठें और एक ‘सेफ वर्ड’ तय करें। नियम बनाएं कि अगर कोई मुसीबत में कॉल करेगा, तो उसे यह शब्द बोलना होगा। अगर आपको ऐसा कोई डरावना कॉल आए, तो सामने वाले से कहें: ठीक है, मैं मदद करूंगा, लेकिन पहले हमारा सीक्रेट कोड बताओ। चूंकि यह AI या स्कैमर को नहीं पता होगा, वह फंस जाएगा या फोन काट देगा।
इस फ्रॉड से बचने के 4 आसान स्टेप्स
अगर आपके पास ऐसा कॉल आए, तो घबराएं नहीं, इन स्टेप्स को फॉलो करें:
- कॉल काटें: स्कैमर आपको फोन पर उलझाए रखना चाहता है। सबसे पहले फोन काट दें।
- वेरिफाई करें: अपने बच्चे या परिजन को उनके पर्सनल नंबर पर तुरंत कॉल करें। अगर वे फोन नहीं उठा रहे, तो उनके दोस्त या ऑफिस/स्कूल में कॉल करें।
- अनजान वीडियो कॉल न उठाएं: कई बार स्कैमर्स वीडियो कॉल करके डीपफेक का इस्तेमाल भी करते हैं। अनजान नंबर से वीडियो कॉल उठाने से बचें।
- सोशल मीडिया प्राइवेसी: अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स को ‘प्राइवेट’ रखें। अपनी आवाज और वीडियो को अनजान लोगों की पहुंच से दूर रखें।
टेक्नोलॉजी जितनी स्मार्ट हो रही है, चोर भी उतने ही हाई-टेक हो रहे हैं। वॉयस क्लोनिंग के इस दौर में कानों पर भरोसा करना मुश्किल है, इसलिए दिमाग का इस्तेमाल करें। याद रखें, पुलिस कभी भी फोन पर पैसों की मांग नहीं करती। अगली बार ऐसा कॉल आए, तो डरें नहीं- ‘सेफ वर्ड’ मांगें।

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