महाराष्ट्र निकाय चुनाव के नतीजों से हलचल; राहुल गांधी को शिवसेना (UBT) की कॉल, एकता पर जोर
महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। रविवार को घोषित स्थानीय निकाय चुनावों के नतीजों ने सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन, खासकर भाजपा को उत्साहित कर दिया। वहीं, विपक्षी महा विकास अघाड़ी (MVA) में खलबली मच गई है। महायुति ने नगर परिषद और नगर पंचायत चुनावों में भारी जीत हासिल की। उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) केवल 9 सीटें ही जीत पाई। इन नतीजों ने विपक्षी एकता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सूत्रों के अनुसार, शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत ने आज कांग्रेस नेता राहुल गांधी से फोन पर बात की और आगामी बीएमसी चुनावों के लिए संयुक्त रणनीति पर चर्चा की। BMC चुनाव 15 जनवरी 2026 को होने वाले हैं।
पहले शिवसेना (UBT) और कांग्रेस दोनों ने बीएमसी चुनाव अलग-अलग लड़ने की बात कही थी। खुद संजय राउत ने कहा था, ‘जो आएगा, आएगा; वरना अकेले लड़ेंगे।’ लेकिन स्थानीय निकाय चुनावों में महायुति की मजबूत जीत और एकनाथ शिंदे की शिवसेना की बढ़त ने उद्धव गुट को कांग्रेस के समर्थन की जरूरत महसूस कराई है। राउत ने बीते दिनों कहा था कि BJP को हराना है तो साथ लड़ना होगा। यह बयान नई हकीकत को दर्शाता है। कांग्रेस ने स्थानीय चुनावों में MVA के घटकों में सबसे अच्छा प्रदर्शन किया, जिससे उसकी स्थिति मजबूत हुई है। BMC पर पहले शिवसेना का 25 सालों तक कब्जा रहा। महाराष्ट्र की राजनीति में BMC का नियंत्रण राज्य की सत्ता के समान माना जाता है। BJP ठाकरे परिवार के वर्चस्व को खत्म करना चाहती है, जबकि उद्धव ठाकरे के लिए यह चुनाव अपनी साख बचाने का आखिरी मौका है।
संजय राउत की मुख्य दुविधा राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के साथ संभावित गठबंधन और कांग्रेस के साथ संबंधों को संतुलित करने की है। कांग्रेस ने मनसे के साथ मंच साझा करने से साफ इनकार किया है, क्योंकि MNS की उत्तर भारतीयों और मुस्लिमों के खिलाफ आक्रामक छवि कांग्रेस के वैचारिक आधार से टकराती है। मुंबई में मराठी मतदाताओं की हिस्सेदारी घट रही है, इसलिए अल्पसंख्यक और उत्तर भारतीय वोट जरूरी हैं। कांग्रेस का इन समुदायों में मजबूत आधार है। अगर उद्धव गुट मनसे के साथ जाता है और कांग्रेस अकेले लड़ती है, तो विपक्षी वोट बंटेंगे। इसका सीधा फायदा बीजेपी-शिंदे गठबंधन को मिलेगा। राउत ने कांग्रेस को मनाने की कोशिश की है कि BJP को हराने के लिए एकजुट होना जरूरी है। अब देखना होगा कि विपक्षी दलों में किस तरह की एकजुटता बन पाती है।

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