ताकत ही बनी कमजोरी, कैसे मंडल के बाद पहली बार जीते इतने कम यादव और मुसलमान
बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे बड़े उलटफेर वाले रहे हैं। एग्जिट पोल्स में आरजेडी के नेतृत्व वाले महागठबंधन की हार का अनुमान लगाया गया था, लेकिन यह पराजय इतनी बड़ी होगी, यह किसी ने सोचा तक नहीं था। तथ्य यह है कि आरजेडी जिस MY समीकरण यानी यादव और मुस्लिम वोटबैंक को अपनी ताकत मान रही थी, वही उसकी कमजोरी बन गया। हालात ऐसे हैं कि विधानसभा में मंडल कमीशन के दौर के बाद सबसे कम यादव पहुंचे हैं। इसके अलावा मुस्लिमों की संख्या भी 11 ही हो गई है और सबसे ज्यादा 5 मुसलमान विधायक अब AIMIM के हैं।
इसकी वजह यह मानी जा रही है कि 17 फीसदी आबादी वाले मुसलमान वोटबैंक और 14 फीसदी यादवों के मुकाबले अन्य समुदाय और जातियां एकजुट नजर आईं। काउंटर-पोलराइजेशन काफी मजबूत रहा और एकमुश्त वोटबैंक तेजस्वी यादव के लिए कम पड़ गया। यह स्थिति कमोबेश हरियाणा जैसी रही है, जहां कांग्रेस ने जाट वोटबैंक के भरोसे जीत की राह पक्की समझी थी, लेकिन काउंटर पोलराइजेशन ने तीसरी बार भी भाजपा को ही जिताया। इस बार तो सबसे ज्यादा विधायक अति पिछड़ा वर्ग के हैं तो वहीं अगड़ों में राजपूत बाजी मार ले गए। वहीं मुस्लिम और यादव के ही सहारे रही आरजेडी के हाथ निराशा लगी है।
बिहार असेंबली में 11 ही मुसलमान विधायक होंगे, जबकि 2020 में 19 थे। इसी तरह यादवों की संख्या भी 28 रह गई है, जो 2020 में 55 थी। लालू प्रसाद यादव के उभार के साथ ही राज्य में यादव विधायकों की संख्या बढ़ती रही थी, लेकिन अब यह आंकड़ा कमजोर पड़ रहा है। वहीं मुसलमान विधायकों की बात करें तो ओवैसी के 5 के बाद आरजेडी के तीन, कांग्रेस के 2 और जेडीयू के पास एक ही विधायक है। इस तरह एनडीए के खेमे का एक ही विधायक मुसलमान है। यह संकेत आरजेडी के भविष्य के लिए भी खतरनाक है। ओवैसी के मुस्लिम विधायकों के जीतने से स्पष्ट है कि अब यह समुदाय खुद को सेकुलर कहने वाले दलों से भी पहले की तरह संतुष्ट नहीं है।
वे अब अपनी हिस्सेदारी खुलकर चाहते हैं और भाजपा की मजबूती के दौर में जिस तरह से सेकुलर दल थोड़ा बैकफुट पर हैं, उससे मुसलमानों में हताशा है। वहीं लालू यादव पर जाति और परिवार की राजनीति के टैग ने यादव नेताओं के लिए भी चुनौती बढ़ाई है। खासतौर पर ऐसे यादवों की परेशानी बढ़ी है, जो आरजेडी के सिंबल पर उतरे। उनसे बेहतर स्थिति तो एनडीए के दलों से उतरे यादवों की रही है। ऐसे में इस वोटबैंक की दरार आरजेडी और तेजस्वी यादव को लंबे वक्त तक परेशान रखेगी। यही नहीं यूपी में अखिलेश यादव तक को यह अलर्ट मोड पर डालने वाला समीकरण है।

Gen Z को विवेकानंद और कलाम जैसा देखना चाहते हैं, कॉकरोच वाली बात पर धीरेंद्र शास्त्री
योगी सरकार Gen-Z को जल्द देगी खुशखबरी, साढ़े 3 महीने में बंपर भर्ती; 1 लाख नौकरी देने की तैयारी
JPNIC की कमाई परिवार तक पहुंचाने की थी साजिश, योगी का अखिलेश पर हमला; बोले-जनता दल जैसा होगा सपा हाल
तमिलनाडु के सीएम विजय का सेंट्रल जेल में सरप्राइज विजिट, कैदियों से बातचीत कर लिया फीडबैक
उत्तर प्रदेश में स्वाइन फ्लू के बढ़ते मामलों के बाद हाई अलर्ट, सभी सरकारी डॉक्टरों की छुट्टियां रद
रामलला को दस हजार, कर्मचारियों को 4 करोड़ का चेक, खाते में केवल तीन रुपए, अब यह आशंका