भारत ने सिंधु पर झटका दिया, तालिबान करेगा कुनार नदी पर मार, पाकिस्तान पर जल प्रहार
पाकिस्तान के साथ जारी तनाव के बीच अफगानिस्तान को भारत का साथ मिला है। भारत ने एक ओर जहां अफगानिस्तान की संप्रभुता के लिए खड़े होने की बात कही है। वहीं, कुनार नदी पर अफगानिस्तान की तरफ से बांध बनाए जाने की योजना का भी समर्थन किया है। खास बात है कि कुनार नदी पाकिस्तान के उत्तर पश्चिम क्षेत्र में बहती है और बांध के कारण प्रवाह पर असर पड़ सकता है।
गुरुवार को इस प्रश्न पर कि क्या भारत, अफगानिस्तान की कुनार नदी पर बांध बनाने की तालिबान सरकार की योजना में मदद करेगा, तो विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने अपनी साप्ताहिक प्रेस वार्ता में इस पर समर्थन जताया है। खास बात है कि जम्मू और कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के साथ हुए सिंधु जल समझौते को स्थगित कर दिया था।
उन्होंने कहा कि तालिबान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी की यात्रा के दौरान जारी संयुक्त बयान में कहा गया था कि भारत, जलविद्युत परियोजनाओं सहित सतत जल प्रबंधन की दिशा में अफगानिस्तान के सभी प्रयासों का समर्थन करने के लिए तैयार है। तालिबान शासन में मंत्री मुत्ताकी अक्तूबर की शुरुआत में भारत दौरे पर आए थे।
जायसवाल ने बांध के मुद्दे पर कहा कि हेरात प्रांत में सलमा बांध समेत ऐसे मुद्दों पर भारत और अफगानिस्तान के बीच सहयोग का इतिहास रहा है। भारत ने कहा, ‘पाकिस्तान इस बात से नाराज है कि अफगानिस्तान अपने क्षेत्रों पर संप्रभुता का उपयोग कर रहा है। ऐसा लगता है कि पाकिस्तान को लगता है कि उसे दंड से मुक्ति के साथ सीमा पार आतंकवाद को अंजाम देने का अधिकार है।’ अफगानिस्तान ने बीते सप्ताह ही कुनार नदीं पर बांध बनाने की योजना का ऐलान किया था।
बीते सप्ताह तालिबान नेता हिबतुल्लाह अखुंदजादा ने ऊर्जा और जल मंत्रालय को कुनार नदी पर जल्द से जल्द बांध बनाने के लिए कहा है। अफगानिस्तान इंटरनेशनल की रिपोर्ट के अनुसार, मंत्री अब्दुल लतीफ मंसूर ने बताया है कि अखुंदजादा ने मंत्रालय को निर्देश दिए हैं कि विदेशी कंपनियों का इंतजार न करें और घरेलू कंपनियों प्रोजेक्ट की शुरुआत करने के लिए कॉन्ट्रेक्ट पर साइन करें।
खास बात है कि कुनार अफगानिस्तान की 5 प्रमुख नदियों में से एक है, जिसकी शुरुआत पाकिस्तान के चितराल में से होती है। यह अफगानिस्तान के कुनार प्रांत में 482 किमी के आसपास बहती और पाकिस्तान में दोबारा मिलने से पहले काबुल नदी से जुड़ती है। काबुल नदी का अधिकांश जल पाकिस्तान पहुंचता है। खैबर पख्तूनख्वा जैसे प्रांत काफी हद तक अफगानिस्तान के जल पर निर्भर है।

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