मंदिर में चढ़ावे से लेकर संपत्ति के कंट्रोल तक, योगी सरकार के श्री बांके-बिहारी अध्यादेश में क्या-क्या हैं प्रावधान
Banke Bihari Ordinance: उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने यूपी विधानसभा में श्री बांके बिहारी मंदिर न्यास को लेकर अध्यादेश पेश किया है। इसके तहत ही बांके बिहारी मंदिर न्यास का गठन किया जाएगा। मंदिर पर आने वाले चढ़ावे से लेकर उसकी चल-अचल संपत्तियों पर न्यास का ही अधिकार होगा। योगी सरकार ने कहा कि न्यास का गठन स्वामी हरिदास परंपरा से होगा और उसी तहत मंदिर का संचालन भी होगा।
सरकार के अध्यादेश के मुताबिक मंदिर का न्यास ही दर्शन का समय तय करेगा और पुजारियों की नियुक्ति से लेकर उनके वेतन और अन्य भत्ते की जिम्मेदारी भी लेगा। इसके अलावा मंदिर में आने वाले भक्तों की सुरक्षा तथा मंदिर के प्रभावी प्रशासन और प्रबंधन की जिम्मेदारी भी न्यास की ही होगी।
अध्यादेश के बाद न्यास के अंतर्गत क्या-क्या होगा?
योगी सरकार के इस अध्यादेश के तहत मंदिर में स्थापित मूर्तियां, मंदिर परिसर और प्रसीमा के भीतर देवताओं के लिए दी गए उपहार, किसी भी पूजा-सेवा-कर्मकांड-समारोह-धार्मिक अनुष्ठान के समर्थन में दी गई संपत्ति, नकद या वस्तु रूपी अर्पण, तथा मंदिर परिसर के उपयोग के लिए डाक/तार से भेजे गए बैंक ड्राफ्ट और चेक तक शामिल हैं। मंदिर की संपत्तियों में आभूषण, अनुदान, योगदान, हुंडी संग्रह सहित श्री बांके बिहारी जी मंदिर की सभी चल एवं अचल संपत्तियां सम्मिलित मानी जाएंगी।
श्रद्धालुओं को मिलेंगी सुविधाएं
अध्यादेश के तहत मंदिर के न्यास के गठन के बाद श्रद्धालुओं को विश्वस्तरीय सुविधाएं देने का टारगेट रखा गया है। ऐसे में प्रसाद वितरण, वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगों के लिए अलग दर्शन मार्ग, पेयजल, विश्राम हेतु बेंच, पहुंच एवं कतार प्रबंधन कियोस्क, गौशालाएं, अन्नक्षेत्र, रसोईघर, होटल, सराय, प्रदर्शनी कक्ष, भोजनालय और वेटिंग रूम जैसी व्यवस्थाएं विकसित की जाएंगी।
कैसा होगा बांके श्री बिहारी मंदिर के न्यास का संगठन?
- न्यास की संरचना- न्यास में 11 मनोनीत और 7 पदेन सदस्य होंगे।
- मनोनीत सदस्यों- वैष्णव परंपराओं,संप्रदायों, पीठों से 3 प्रतिष्ठित सदस्य
- सनातन धर्म की किसी भी शाखा/संप्रदाय से 3 सदस्य
- गोस्वामी परंपरा से 2 सदस्य- स्वामी हरिदास जी के वंशज; एक राज-भोग सेवादारों और दूसरा शयन-भोग सेवादारों का प्रतिनिधि
- सभी मनोनीत सदस्य सनातनी हिंदू होंगे, जिनका कार्यकाल 3 वर्ष का होगा।
- पदेन सदस्य में मथुरा के जिला मजिस्ट्रेट, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, नगर निगम आयुक्त, उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ क्षेत्र विकास परिषद के सीईओ, बांके बिहारी मंदिर ट्रस्ट के सीईओ और राज्य सरकार का नामित प्रतिनिधि शामिल होंगे।
- इसके अलावा कोई पदेन सदस्य में कोई सनातन धर्म को मानने वाला नहीं हुआ तो फिर उसकी जगह किसी अन्य अधिकारी को मनोनीत किया जाएगा।

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