चेतक और चीता होंगे रिटायर, सेना खरीदेगी 200 नए हल्के हेलीकॉप्टर — आत्मनिर्भर भारत की बड़ी छलांग
🚁 सेना का हेलीकॉप्टर बेड़ा होगा अपग्रेड — पुराने चीता और चेतक होंगे बाहर

भारतीय सेना अब अपने पुराने हो चुके चेतक और चीता हेलीकॉप्टरों को रिटायर करने जा रही है। इन हेलीकॉप्टरों ने दशकों तक भारतीय सैन्य अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, लेकिन अब तकनीकी रूप से ये outdated हो चुके हैं।
इनकी जगह लेने के लिए सेना ने 200 नए लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टर (LUH) खरीदने का फैसला किया है।
ये कदम न केवल सेना की परिचालन क्षमताओं को बढ़ाएगा, बल्कि भारत की आत्मनिर्भर रक्षा नीति (Make in India in Defence) के तहत स्वदेशी रक्षा उत्पादन को भी मज़बूती देगा।
🛩️ चेतक और चीता — ऐतिहासिक सेवा, लेकिन अब समय विदाई का
चेतक और चीता हेलीकॉप्टरों की सेवा की शुरुआत 1960 और 70 के दशक में हुई थी। ये हेलीकॉप्टर ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बचाव कार्य, रसद आपूर्ति, टोही, और सैनिकों की आवाजाही में दशकों से इस्तेमाल किए जाते रहे हैं।
विशेषकर सियाचिन ग्लेशियर और कश्मीर घाटी जैसे उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में इनका प्रयोग किया गया है। लेकिन अब ये तकनीकी रूप से पुराने पड़ चुके हैं, और इनके रख-रखाव की लागत और ऑपरेशनल खतरे बढ़ गए हैं।
🛠️ 200 हल्के हेलीकॉप्टरों की खरीद — स्वदेशी निर्माण को बढ़ावा
रक्षा मंत्रालय ने घोषणा की है कि ये 200 नए हेलीकॉप्टर स्वदेशी कंपनियों के सहयोग से तैयार किए जाएंगे। इसमें प्रमुख रूप से हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) की भूमिका होगी, जिसने पहले ही LUH (Light Utility Helicopter) मॉडल विकसित कर लिया है।
HAL के अधिकारियों के अनुसार:
“नए LUH में डिजिटल कॉकपिट, फ्यूल एफिशिएंसी, और हाई-एल्टीट्यूड ऑपरेशन की बेहतर क्षमता होगी। यह पुराने हेलीकॉप्टरों का सशक्त विकल्प साबित होगा।”
इन हेलीकॉप्टरों का प्रयोग भारतीय सेना के साथ-साथ भारतीय वायुसेना और नौसेना भी कर सकेंगी। ये हेलीकॉप्टर 6000 मीटर तक की उड़ान क्षमता, तेज़ संचालन, और कम मेंटेनेंस जैसी खूबियों से लैस होंगे।
🇮🇳 आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत रक्षा मजबूती
यह खरीद भारत के आत्मनिर्भर रक्षा अभियान की दिशा में एक बड़ी छलांग मानी जा रही है।
जहां पहले सेना के अधिकतर एयर प्लेटफॉर्म्स विदेशों से खरीदे जाते थे, अब सरकार और रक्षा मंत्रालय का फोकस “Make in India, Make for the World” पर है।
ये हेलीकॉप्टर न केवल घरेलू आवश्यकताओं को पूरा करेंगे, बल्कि भविष्य में भारत इन्हें एक्सपोर्ट भी कर सकता है।
🔍 परिचालन प्रभाव — सेना को मिलेगी नई ताकत
LUH के आने से सेना को उच्च दुर्गम क्षेत्रों में तेज़ी से लॉजिस्टिक सपोर्ट, घायल जवानों की एयरलिफ्टिंग, और त्वरित निगरानी जैसे कार्यों में बेहतर ऑपरेशनल फ्लेक्सिबिलिटी मिलेगी।
विशेषज्ञ मानते हैं कि मौजूदा जियो-पॉलिटिकल माहौल में ऐसे अपग्रेड्स भारत की रणनीतिक सुरक्षा तैयारियों को मजबूत करेंगे — खासकर जब LAC और LOC जैसे संवेदनशील इलाकों में तनाव बना रहता है।
📈 निष्कर्ष
भारतीय सेना का यह कदम सिर्फ हेलीकॉप्टर खरीद भर नहीं है — यह एक रणनीतिक, तकनीकी और राजनीतिक संदेश भी है।
चेतक और चीता जैसे हेलीकॉप्टरों ने भारतीय सेना की सेवा में स्वर्णिम अध्याय लिखा है, लेकिन अब समय है एक नई पीढ़ी के प्लेटफॉर्म्स को शामिल करने का।
यह फैसला भारतीय रक्षा क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाने, ऑपरेशनल क्षमता बढ़ाने और देश को वैश्विक रक्षा निर्माण की रेस में आगे लाने का प्रतीक है।

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