लखनऊ के प्राइमरी स्कूल का हाल, तिरपाल के नीचे पढ़ाई, ऊपर से गुजरी हाईटेंशन लाइन
राजधानी लखनऊ के अपर प्राइमरी स्कूल महीपतमऊ में दो वर्ष से तिरपाल के नीचे कक्षाएं चल रही हैं। स्कूल का भवन करीब 10 वर्ष से जर्जर है। साथ ही स्कूल के ऊपर से हाईटेंशन लाइन गई है। स्कूल के शिक्षकों ने बीईआ से लेकर बीएसए को कई शिकायती पत्र भेजे, लेकिन किसी ने जर्जर भवन न मरम्मत करायी और न ही हाईटेंशन लाइन हटावाने का प्रयास किया। जर्जर भवन के ढहने और हाईटेंशन लाइन के डर से शिक्षकों ने खुद के खर्च से बांस के टट्टर और तिरपाल से तीन अस्थायी कक्षाएं बनवायी। 25 जुलाई को राजस्थान में एक सरकारी स्कूल की घटना के बाद बीएसए राम प्रवेश ने जर्जर स्कूलों में कक्षाएं न संचालित करने का आदेश जारी किया था, लेकिन जर्जर स्कूलों की मरम्मत के सम्बंध में कोई कदम नहीं उठाए।

राजधानी लखनऊ के अपर प्राइमरी स्कूल महीपतमऊ में दो वर्ष से तिरपाल के नीचे कक्षाएं चल रही हैं। स्कूल का भवन करीब 10 वर्ष से जर्जर है। साथ ही स्कूल के ऊपर से हाईटेंशन लाइन गई है। स्कूल के शिक्षकों ने बीईआ से लेकर बीएसए को कई शिकायती पत्र भेजे, लेकिन किसी ने जर्जर भवन न मरम्मत करायी और न ही हाईटेंशन लाइन हटावाने का प्रयास किया। जर्जर भवन के ढहने और हाईटेंशन लाइन के डर से शिक्षकों ने खुद के खर्च से बांस के टट्टर और तिरपाल से तीन अस्थायी कक्षाएं बनवायी। 25 जुलाई को राजस्थान में एक सरकारी स्कूल की घटना के बाद बीएसए राम प्रवेश ने जर्जर स्कूलों में कक्षाएं न संचालित करने का आदेश जारी किया था, लेकिन जर्जर स्कूलों की मरम्मत के सम्बंध में कोई कदम नहीं उठाए।
बच्चे कम हो गए
स्कूल में कक्षा छह, सात व आठ के 113 बच्चे इन्हीं कक्षाओं में पढ़ाई कर रहे हैं। स्कूल में चार शिक्षक और दो अनुदेशक तैनात हैं। जर्जर भवन के चलते स्कूल में बच्चों की संख्या घट गई है। पहले यह संख्या 117 बच्चे थे। अभिभावकों ने दूसरे स्कूल में दाखिला करा दिया है। अभिभावकों का कहना है कि जर्जर स्कूल भवन किसी समय ढह सकता है। और स्कूल से ऊपर से हाईटेंशन लाइन गई है। बच्चों की सुरक्षा के चलते दो वर्ष से गांव के नए बच्चे इस स्कूल में दाखिला नहीं ले रहे हैं।
बारिश का पानी आता है कक्षाओं के भीतर
शिक्षकों ने बताया कि तेज बारिश में पानी की बौछारें कक्षाओं के भीतर आती है। तिरपाल से भी पानी टपकने लगता है। कक्षाओें में पानी भर जाता है। ऐसे में बच्चों की पढ़ाई नहीं हो पाती है। गर्मी, सर्दी और बारिश में बच्चे तिरपाल के नीचे पढ़ाई करने के लिये मजूबर हैं। कई शिकायतों के बावजूद विभागीय अधिकारियों ने मरम्मत नहीं करायी। भवन के ज्यादा जर्जर होने पर शिक्षकों ने ग्रामीणों की मदद से बांस के टट्टर से तीन कक्षाएं बनवायी। अब इन्हीं कक्षाओं में बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। शिक्षकों ने भवन की मरम्मत के लिये बीईओ से लेकर बीएसए को कई पत्र भेजे, लेकिन अधिकारियों ने कोई सुध नहीं ली।
जिम्मेदारी से भागे अफसर
बीएसए राम प्रवेश से इस सम्बंध में बात की गई तो उनका फोन मुख्यालय बीईओ राजेश सिंह ने उठाया। उन्होंने बताया कि तिरपाल में स्कूल के संचालन की जानकारी नहीं है। क्षेत्रीय बीईओ से बात कर लीजिये। जब काकोरी के प्रभारी बीईओ राम राज से बात की गई तो उन्होंने कहा कि इसकी जानकारी नहीं हैं। मंगलवार को पता करके बता पाऊंगा।

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