मुंबई ट्रेन ब्लास्ट: 19 साल बाद 11 आरोपी बरी, नहीं मिले पुख्ता सबूत, 189 लोगों की गई थी जान
Mumbai Local Train Bomb Blast Case: मुंबई लोकल ट्रेन बम ब्लास्ट मामले में हाई कोर्ट ने सभी 12 आरोपियों को बरी कर दिया है। जिस हमले में 189 लोगों की दर्दनाक मौत हुई थी, उसमें हाई कोर्ट के फैसले ने सभी को हैरान कर दिया है। सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई है कि जांच एजेंसियां पर्याप्त सबूत पेश नहीं कर सकीं और इसी वजह से इन 12 लोगों को बरी कर दिया गया।
हाई कोर्ट के इस एक फैसले के बाद सभी के मन में एक सवाल आ रहा है- आखिर 11 जुलाई 2006 को ऐसा क्या हुआ था? ऐसे कौन से बम धमाके हुए थे जिसने 189 लोगों की जान ले ली 11 जुलाई की शाम को मुंबई में ऐसा क्या हुआ कि लोगों ने उसे 1992 के धमाकों के बाद सबसे बड़ा हमला करार दिया?

11 जुलाई को क्या हुआ था?
असल में 11 जुलाई 2006 को मुंबई की लोकल ट्रेनों को निशाना बनाया गया था। ये वही ट्रेनें हैं जिन्हें लोग मायानगरी की लाइफ लाइन तक कहते हैं, कहीं भी जाना हो तो टैक्सी से ज्यादा लोग इन्हीं ट्रेनों का इस्तेमाल करते हैं। इससे समय भी बचता है और पैसे भी कम लगते हैं। लेकिन आरोपियों ने इसी बात का फायदा उठाया, ज्यादा भीड़ को देखते हुए उनकी तरफ से इन्हीं लोकल ट्रेनों को निशाने पर लिया गया। सबसे पहला धमाका शाम को 6:24 पर हुआ, उसके बाद सात और बम धमाके हुए, बात चाहे माटुंगा रूट की हो, बांद्रा की हो, खार रोड की हो, माहिम जंक्शन की हो, जोगेश्वरी की हो, भयंदर की हो या फिर बोरिवली रेलवे स्टेशन की, सभी जगह एक के बाद एक बड़े धमाके हुए और भारी तबाही देखने को मिली।

हैरानी की बात यह थी इन बम धमाकों को साजिश के तहत अंजाम दिया गया, सभी धमाकों में सिर्फ एक से 2 मिनट का ही अंतर रहा। पहला धमाका 6:24 पर हुआ, इसी तरह बाकी कई और धमाके हुए और 11 मिनट के अंदर पूरी मुंबई बम ब्लास्ट से दहल गई।
कहां-कहां हुए धमाके, कितने मरे?
चर्चगेट बोरीवली के बीच जो लोकल ट्रेन चली थी, सबसे ज्यादा 43 मौतें वहीं पर देखने को मिलीं। मीरा रोड भयंदर की लोकल ट्रेन में 31 लोगों की जान चली गई, इसी तरह चर्चगेट-विरार लोकल ट्रेन में 28 लोगों ने और चर्चगेट- बोरिवली लोकल ट्रेन में भी 28 लोगों ने अपनी जान गंवाई।
हमलों को कैसे दिया गया अंजाम?
जब इन बम ब्लास्ट की जांच शुरू हुई तो पता चला कि मुंबई के वेस्टर्न लाइन की लोकल ट्रेनों को ही निशाने पर लिया गया था। वही प्रेशर कुकर की मदद से उन धमाकों को अंजाम दिया गया। जिन भी कोच में धमाके हुए थे, उनके परखच्चे पूरी तरह उड़ गए। जांच में ये भी पाया गया कि आरोपियों ने दूर जाने वाली ट्रेनों को अपने निशाने पर लिया था क्योंकि सबसे ज्यादा ऑफिस जाने वाले लोग उन्हीं ट्रेनों में मौजूद थे। पाकिस्तान से ऑपरेट कर रहे लश्कर ऐ तैयबा ने इस हमले की जिम्मेदारी ली थी।
निचली अदालत ने माना था दोषी
अब इस बड़े आतंकी हमले की बाद निचली अदालत में तो पांच दोषियों को फांसी की सजा और सात को उम्र कैद की सजा सुनाई गई थी। लेकिन जब बाद में इन्हीं फैसलों को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई तो मामला पूरी तरह पलट गया। आरोपियों के वकील ने दावा किया कि जबरदस्ती टॉर्चर कर पुलिस ने कबूलनामा लिखवाया गया। इसी वजह से पुलिस का केस कमजोर हो गया और हाई कोर्ट ने सभी आरोपियों को बरी किया।

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