राघव चड्ढा को पाला बदलने से ऐसा नुकसान! 24 लाख लोगों ने छोड़ दिया साथ
राघव चड्ढा ने बीते दिनों आम आदमी पार्टी में तब भूचाल ला दिया था, जब वे 6 अन्य सांसदों के साथ मिलकर भाजपा में शामिल हो गए थे। सभी सांसदों के राज्यसभा में भाजपा पार्टी से विलय की मंजूरी भी मिल गई है। दूसरी तरफ आम आदमी पार्टी भी इन नेताओं की सांसदी छीनने का प्रयास कर रही है। पाला बदलने से राघव चड्ढा को कितना फायदा हुआ या होगा… यह तो आने वाला समय बताएगा, लेकिन सोशल मीडिया पर उन्हें तगड़ा नुकसान हुआ है। इंस्टाग्राम पर अब तक 24 लाख लोगों ने उनका साथ छोड़ दिया है। बीते शुक्रवार 24 अप्रैल को राघव चड्ढा के इंस्टा पर 14.6 मिलियन फॉलोअर्स थे। वहीं, अब घटकर 12.2 मिलियन हो गए हैं। यानी 24 लाख लोगों ने उनका साथ छोड़ दिया है।
वहीं, आम आदमी पार्टी छोड़ने के फैसले पर उठ रहे सवालों के बीच राघव चड्ढा ने अपनी सफाई दी। उन्होंने कहा कि पार्टी के अंदर का माहौल काफी बिगड़ चुका था और नेताओं को ठीक से काम करने का मौका नहीं मिल रहा था।
राघव चड्ढा, जो छह अन्य सांसदों के साथ भाजपा में शामिल हुए हैं, ने सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो में बताया कि पिछले तीन दिनों में उन्हें ढेरों संदेश मिले। कुछ लोगों ने उनके फैसले का स्वागत किया, जबकि कई लोग यह जानना चाहते थे कि उन्होंने पार्टी क्यों छोड़ी।
चड्ढा ने साफ कहा कि “एक-दो लोग गलत हो सकते हैं, लेकिन सभी सात नहीं”, और इशारा किया कि उनका यह फैसला किसी एक व्यक्ति की वजह से नहीं, बल्कि पार्टी के माहौल से जुड़ी बड़ी वजहों के कारण लिया गया है।
गौरतलब है कि राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल ने 24 अप्रैल को घोषणा की कि वे पार्टी के चार अन्य सांसदों के साथ भाजपा में शामिल हो रहे हैं। आम आदमी पार्टी छोड़ने वाले अन्य सदस्य हरभजन सिंह, राजिंदर गुप्ता, स्वाति मालीवाल और विक्रमजीत साहनी हैं।
बीते शुक्रवार को सातों सांसदों ने राज्यसभा के सभापति को पत्र लिखकर उन्हें भाजपा में शामिल होने के बाद पार्टी का सदस्य माने जाने का अनुरोध किया था और सूत्रों के अनुसार, उनका अनुरोध स्वीकार कर लिया गया है।
दूसरी तरफ आम आदमी पार्टी की दिल्ली इकाई के प्रमुख सौरभ भारद्वाज ने राघव चड्ढा के “खराब कार्यस्थल” वाले उदाहरण पर पलटवार करते हुए कहा कि जब कोई कर्मचारी कंपनी छोड़ने का फैसला करता है, तब भी वह संगठन की छवि को नुकसान पहुंचाने की साजिश रचने के बजाय नोटिस अवधि पूरी करता है।
उन्होंने ‘एक्स’ पर पोस्ट किये गए एक वीडियो में कहा, “किसी कंपनी को बदलने में विचारधारा का कोई लेना-देना नहीं है। लेकिन अगर कोई किसी राजनीतिक दल की विचारधारा से सहमत है, तभी वह उसमें शामिल होता है।”
भारद्वाज ने आगे कहा कि किसी कंपनी में भी, जो कर्मचारी नौकरी छोड़ने का फैसला करता है, वह पेशेवर नैतिकता का पालन करता है।

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