यूपी में वोटर लिस्ट SIR अभियान; 2003 की सूची में है पूर्वजों का रिकॉर्ड तो नहीं देना होगा कोई दस्तावेज
बिहार में विवाद और चर्चा का कारण बना मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान यानी SIR अब यूपी में भी शुरू हो चुका है। इसे लेकर लोगों में तरह-तरह के भ्रम हैं। इन भ्रमों को अधिकारी दूर करने की कोशिश में जुटे हुए हैं। निर्वाचन आयोग ने जिलाधिकारियों को इस बारे में निर्देश दिए हैं। इन निर्देशों के तहत ही गोरखपुर में जिलाधिकारी दीपक मीणा ने कलेक्ट्रेट सभागार में विस्तारपूर्वक जानकारी दी। उन्होंने कहा कि एसआईआर का उद्देश्य मतदाता सूची को त्रुटिरहित और पारदर्शी बनाना है। इसमें लोग किसी प्रकार से भ्रमित न हो। गणना पत्रक वितरण और इसको वापस जमा होने तक एक माह के दौरान कोई पहचान पत्र नहीं लिया जा रहा है। 2003 की मतदाता सूची से जिनके पूर्वजों के नाम का रिकॉर्ड भी मिलेगा, उनसे दस्तावेज नहीं लिए जाएंगे, जबकि जिनके नाम का मिलान 2003 की सूची से नहीं होगा, उन्हें उम्र के अनुसार अपनी पहचान के दस्तावेज जमा करने होंगे।
जिलाधिकारी ने बताया कि जिन निर्वाचकों की जानकारी विशेष पुनरीक्षण मतदाता सूची में उपलब्ध नहीं है या डेटाबेस से भिन्न है, उन्हें संबंधित निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (इआरओ ) की ओर से नोटिस जारी किया जाएगा। ऐसे लोगों को अपनी जन्म-तिथि, जन्म-स्थान एवं नागरिकता संबंधी प्रमाण-पत्र निर्धारित श्रेणियों के अनुसार प्रस्तुत करने होंगे।
एक जुलाई 1987 से पहले जन्मे नागरिकों को स्वयं का कोई भी वैध अभिलेख देना होगा, जिससे जन्म तिथि या जन्म स्थान प्रमाणित हो। एक जुलाई 1987 से दो दिसंबर 2004 के बीच जन्में लोगों को स्वयं तथा अपने पिता या माता के अभिलेख प्रस्तुत करने होंगे। दो दिसंबर 2004 के बाद जन्मे नागरिकों को स्वयं, पिता तथा माता, तीनों के जन्म से संबंधित प्रमाण-पत्र देने होंगे। यदि अभिभावक में से कोई भारतीय नागरिक नहीं है, तो जन्म के समय वैध पासपोर्ट एवं वीजा की प्रति जमा कर सकते हैं।आनलाइन देख सकते हैं 2003 की मतदाता सूची, गणना प्रपत्र भी भर सकते हैं।
जिलाधिकारी ने कहा कि बीएलओ भी किसी का गणना प्रपत्र नहीं छोड़ सकते। उनकी नियमित मानिटरिंग हो रही है। सभी बीएलओ को एक-एक गणना प्रपत्र का रिकार्ड है कि वे एप पर दर्ज नहीं किए गए तो क्यों नहीं किए गए। गणना प्रपत्र वितरण कार्य की हर सप्ताह समीक्षा की जा रही है।अभियान के बीच भी यदि कोई मतदाता बनना चाहता है, विधानसभा क्षेत्र बदलवाना चाहता है या मृतक मतदाताओं के नाम कटवाना चाहता है तो वह पूर्व की ही तरह निर्धारित फार्म को भरकर जमा कर सकता है।
पांच-पांच लाख पुरुष और महिला मतदाता बढ़े: वर्ष 2003 की मतदाता सूची में कुल 26.68 लाख मतदाता थे। यह संख्या अब बढ़कर 36.66 लाख हो गई है। इस दौरान पांच-पांच लाख पुरुष और महिला मतदाता बढ़े है, एसआईआर में डुप्लीकेट वोटर कम हो जाएंगे।
जिलाधिकारी ने कहा कि प्रत्येक पोलिंग बूथ पर 1200 तक ही मतदाता सुनिश्चित कराए जाएंगे। शहर की हाई राइजिंग बिल्डिंग में भी नए बूथ बनाए जाएंगे। अभियान के लिए 3679 बीएलओ लगाए गए हैं। बीएलओ यूनिक एन्यूमरेशन फार्म को अपने क्षेत्र के मतदाता तक पहुंचाएंगे और उन्हें 2003-2004 में हुए पिछली एसआइआर के रिकार्ड से नाम या पूर्वजों के नाम से मिलान करने में मदद करेंगे। इसके लिए बीएलओ को आल-इंडिया डेटाबेस से जानकारी लेने की भी सुविधा दी गई है , ताकि यदि वोटर का नाम 2003-04 में किसी अलग मतदान केंद्र, विधानसभा या राज्य में रहा हो तो उसका मिलान किया जा सके।

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