‘पंचामृत’ और ‘चरणामृत’ में क्या अंतर है? जन्माष्टमी से पहले जान लें दोनों को बनाने की विधि
कोई भी धार्मिक अनुष्ठान हो या पूजा-पाठ, प्रसाद रूप में पंचामृत और चरणामृत जरूर बनाए जाते हैं। इन दोनों का धार्मिक महत्व बहुत ज्यादा होता है। श्री कृष्ण जन्माष्टमी के दिन भी कृष्ण लला को पंचामृत और पंजीरी का भोग लगाया जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि पंचामृत और चरणामृत दोनों में क्या अंतर है? कई लोगों को लगता है कि पंचामृत और चरणामृत दोनों एक ही चीज हैं, जबकि ऐसा नहीं है। इन दोनों के बीच एक बड़ा अंतर है और दोनों को ही खास मौकों पर बनाया जाता है। तो आइए जानते हैं आखिर पंचामृत और चरणामृत दोनों कैसे अलग-अलग हैं। साथ ही इन्हें बनाने का तरीका भी जानेंगे।

क्या होता है पंचामृत?
पंचामृत सुनकर ही पता चलता है कि ये पांच चीजों का मिश्रण है। इसे बनाने के लिए पांच चीजों का इस्तेमाल किया जाता है, जिन्हें बहुत ज्यादा शुभ माना जाता है। कहते हैं ये मिलकर अमृत समान हो जाती हैं इसलिए इनका धार्मिक महत्व बहुत ज्यादा है। ये पांच चीजें हैं – गाय का दूध, दही, देसी घी, शहद और चीनी। इन सभी चीजों को एक खास मात्रा में मिलाकर पंचामृत तैयार किया जाता है। जन्माष्टमी पर इसका इस्तेमाल बाल गोपाल के अभिषेक के लिए किया जाता है।
ऐसे बनाएं पंचामृत
पंचामृत बनाने के लिए एक कप गाय दूध, 1 कप दही, 1 चम्मच देसी घी, 3 चम्मच शहद, स्वादानुसार चीनी, तुलसी के पत्ते, कटे हुए मखाने और ड्राई फ्रूट्स ले लें। अब एक बर्तन में दूध, दही, घी, शहद और चीनी को एक बर्तन में डालकर मथ लें। आप इन्हें मिक्सी में भी चला सकती हैं। अब इसके बाद इसमें तुलसी के पत्ते और कटे हुए ड्राई फ्रूट्स मिला दें। आपका पंचामृत बनकर तैयार है।
चरणामृत क्या होता है?
जैसा कि चरणामृत के नाम से ही स्पष्ट है कि इसका अर्थ होता है भगवान के चरणों का अमृत। ये एक तरह का पवित्र जल होता है, जो भगवान के चरणों में अर्पित किया जाता है। शास्त्रों में इसे ले कर कई नियम बताए गए हैं। कहते हैं कि चरणामृत ग्रहण करने के बाद सिर पर हाथ भी नहीं फेरना चाहिए। इसे हमेशा अपने दाहिने हाथ से शांत मन के साथ ग्रहण करना चाहिए।
कैसे बनाएं चरणामृत
चरणामृत बनाने के लिए तांबे के कलश में जल भर लें। इसमें थोड़ा सा गंगाजल भी मिलाएं और साथ ही तुलसी के पत्ते और तिल भी। कई लोग इसमें औषधीय गुणों वाली और भी चीजें शामिल करते हैं। तांबे के कलश में रखने के कारण इस जल में कई औषधीय गुण अपने आप ही आ जाते हैं। ये मानसिक शांति प्रदान करने वाला होता है।

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