क्या अमेरिका से विमान और हथियारों की खरीद भारत ने रोकी? सरकार ने संसद में दिया जवाब
क्या भारत ने अमेरिका से डिफेंस डील रोक दी है?

हाल ही में कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया कि भारत सरकार ने अमेरिका से लड़ाकू विमानों, मिसाइलों और अन्य रक्षा उपकरणों की खरीद रोक दी है। इन रिपोर्ट्स के बाद देशभर में सवाल उठने लगे कि क्या भारत ने रणनीतिक दृष्टिकोण से अमेरिका से दूरी बनानी शुरू कर दी है?
इस मुद्दे पर संसद में सवाल उठाए गए और सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की गई।
🏛️ सरकार का संसद में जवाब: “कोई खरीद नहीं रोकी गई”
रक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट रूप से इन खबरों को अफवाह और भ्रामक बताया है। रक्षा मंत्री द्वारा संसद में दिए गए जवाब में कहा गया:
“भारत सरकार ने अमेरिका से कोई रक्षा सौदा रद्द नहीं किया है। सभी प्रस्तावित सौदे, मूल्यांकन और प्रक्रिया के अनुसार ही आगे बढ़ रहे हैं।”
सरकार ने यह भी कहा कि रक्षा उपकरणों की खरीद एक लंबी और प्रक्रियात्मक प्रक्रिया है जिसमें तकनीकी मूल्यांकन, लागत विश्लेषण और सामरिक जरूरतों को ध्यान में रखा जाता है। इसलिए, कभी-कभी निर्णयों में समय लगना स्वाभाविक है।
🇮🇳 भारत-अमेरिका रक्षा संबंध: बीते वर्षों में बड़ी डील्स
भारत और अमेरिका के बीच पिछले कुछ वर्षों में कई बड़ी रक्षा डील्स हुई हैं:
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MH-60R Seahawk हेलीकॉप्टर: 24 यूनिट्स की खरीद अमेरिका से की जा रही है, जिनमें से कुछ पहले ही डिलीवर हो चुके हैं।
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Apache और Chinook हेलीकॉप्टर: अमेरिका से खरीदे गए ये हेलीकॉप्टर भारतीय वायुसेना की रणनीतिक ताकत बढ़ा चुके हैं।
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Predator (MQ-9 Reaper) Drones: इस सौदे पर चर्चा अंतिम चरण में है, जो निगरानी और स्ट्राइक ऑपरेशन के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
ऐसे में भारत का अचानक अमेरिका से दूरी बनाना रणनीतिक रूप से अव्यवहारिक भी माना जा रहा था।
🧭 आत्मनिर्भर भारत और रक्षा उत्पादन का असर?
कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि भारत ने पिछले कुछ वर्षों में रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता (Atmanirbhar Bharat) को प्राथमिकता दी है। HAL, DRDO और अन्य भारतीय रक्षा कंपनियों के बढ़ते योगदान के चलते सरकार अब स्वदेशी विकल्पों को प्राथमिकता दे रही है।
इसका ये मतलब नहीं कि भारत पूरी तरह से विदेशों से खरीद को बंद कर रहा है, बल्कि अब भारत संयुक्त उत्पादन (joint manufacturing), टेक्नोलॉजी ट्रांसफर जैसे मॉडल्स को ज़्यादा पसंद कर रहा है।
🕊️ भारत की रणनीति: बैलेंस और साझेदारी
भारत ने हमेशा से “स्ट्रैटेजिक ऑटोनॉमी” को प्राथमिकता दी है – यानी किसी एक देश पर पूर्ण निर्भरता नहीं, बल्कि सभी प्रमुख शक्तियों के साथ संतुलन बनाए रखना।
अमेरिका के साथ साझेदारी मजबूत है, लेकिन भारत रूस, फ्रांस, इजरायल जैसे देशों से भी रक्षा सहयोग बनाए रखे हुए है। भारत की नीति स्पष्ट है – जो तकनीक, गुणवत्ता और कीमत में बेहतर होगा, वही खरीदा जाएगा, चाहे वो देश कोई भी हो।
📈 निष्कर्ष
सरकार ने साफ कर दिया है कि अमेरिका से कोई डिफेंस डील रद्द नहीं की गई है। मीडिया में आई अफवाहों को सिरे से नकारते हुए सरकार ने संसद में भरोसा दिलाया कि सभी रणनीतिक खरीद निर्णय राष्ट्रीय हित, तकनीकी आवश्यकता और लंबी अवधि की सामरिक रणनीति के अनुसार लिए जाते हैं।
अमेरिका भारत का एक मजबूत रक्षा साझेदार बना रहेगा, लेकिन अब भारत विदेशी खरीद से आगे बढ़कर स्वदेशी समाधान की दिशा में तेज़ी से कदम बढ़ा रहा है।

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