Air India में नहीं होगी कोई छंटनी, वैरिएबल और इंक्रीमेंट पर भी आया बड़ा अपडेट
एयर इंडिया ने अपने कर्मचारियों को बड़ा आश्वासन दिया है। एयर इंडिया के एमडी और सीईओ कैम्पबेल विल्सन सहित टॉप अधिकारियों ने संकेत दिया है कि कंपनी कोई भी छंटनी नहीं करने जा रही है। शुक्रवार को कंपनी के टाउन हाल का आयोजन किया गया था। मौजूदा परिस्थियों में जेट फ्यूल बढ़ने की वजह से कंपनी को भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि, कंपनी के टॉप लेवले के अधिकारियों की तरफ से मिल संकेत के अनुसार सालाना इंक्रीमेंट को कम से कम एक तिमाही के लिए टाल दिया गया है।
दी न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार विल्सन ने अपनी मर्जी से किए जाने वाले खर्च में कटौती के निर्देश दिए हैं। साथ ही गैर जरूरी खर्चों को भी टाल देने की सलाह उन्होंने कर्मचारियों को दी है। इसके पीछे की वजह उन्होंने एयरलाइंस के खर्चों में कटौती को बताया है। इसी मीटिंग में विल्सन ने मौजूदा परिस्थियों की बात की जिसका असर एयरलाइन पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में अपने खर्चों पर ध्यान देना चाहिए। बता दें, इस टाउन हाल में एयर इंडिया के सीएफओ संजय शर्मा और एचआर रविंद्र कुमार जीपी भी मौजूद रहे।
कंपनी के एचआर ने कहा कि एयर इंडिया अपने तय वैरिएबल की प्रक्रिया को जारी रखेगी। वहीं, प्रमोशन प्रोसेस भी समय से होगा। हालांकि, सालाना इंक्रीमेंट को मौजूदा परिस्थियों की वजह से एक तिमाही के लिए टाल दिया गया है। उन्होंने कहा कि हम कोई छंटनी नहीं करने जा रहे है। मौजूदा समय में एयर इंडिया के पास कुल 24000 कर्मचारी हैं।
इस टाउन हाल में विल्सन ने मौजूदा परिस्थियों के विषय में बातचीत की। उन्होंने वैश्विक और घरेलू स्तर पर के चैलेंज की भी चर्चा की जिसकी वजह से एयरलाइन इंडस्ट्री प्रभावित हो रही है। इसी मीटिंग में विल्सन ने पाकिस्तान एयरस्पेस की भी चर्चा की। पिछले साल मई से पाकिस्तान का एयरस्पेस बंद है। इसके अलावा घटते रुपये के दाम और बढ़ते एटीएफ की कीमत को लेकर भी चर्चा हुई।
पिछले महीने के अंततक एटीएफ के दाम में लगभग दोगुना इजाफा देखने को मिल गया है। जिसके बाद एटीएफ का रेट 180 डॉलर से 190 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है। अप्रैल के महीने में घरेलू उड़ानों के लिए सरकार ने एटीएफ के दाम में 15 रुपये प्रति लीटर का इजाफा किया था। बता दें, एटीएफ का खर्च एयर लाइन के कुल खर्च का 30 से 40 प्रतिशत तक होता है। जिसका साफ मतलब हुआ कि एटीएफ का रेट बढ़ने की वजह से एयरलाइन कंपनियों का खर्च बढ़ जाता है।

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