बिहार के अगले मुख्यमंत्री का होगा ‘गुजरात कनेक्शन’, प्रशांत किशोर ने क्या भविष्यवाणी कर दी?
नीतीश कुमार के राज्यसभा चुनाव जीतने के बाद बिहार में नए मुख्यमंत्री पर अटकलें जारी हैं। अभी तक एनडीए में यह फाइनल नहीं हुआ है कि बिहार का अगला सीएम कौन होगा, चर्चा है कि भाजपा पहली बार बिहार में अपना मुख्यमंत्री बना सकती है। राजनीतिक भविष्यवाणियों से चर्चा में रहने वाले पूर्व चुनावी रणनीतिकार एवं जन सुराज पार्टी के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने अब बिहार के नए सीएम के ‘गुजरात कनेक्शन’ का दावा किया है।
पीके ने बुधवार को मुंगेर में मीडिया से बातचीत में कहा कि नीतीश के बाद बिहार का मुख्यमंत्री कौन होगा, यह किसी को नहीं पता है। इस बारे में जो भी अटकलें लगाई जा रही हैं, वे बेकार हैं। उन्होंने दावा किया कि अगला सीएम जो भी होगा, वो बिहार का नहीं बल्कि गुजरात के हितों का ध्यान रखेगा। वह केंद्र में मौजूद नरेंद्र मोदी सरकार की पसंद का होगा।
उन्होंने कहा, “बिहार में पहली बार सीएम की गद्दी पर वो लोग बैठेंगे, जिनकी प्राथमिकता बिहार नहीं बल्कि गुजरात होगी। गुजरात के हितों को ध्यान में रखकर बिहार को चलाया जाएगा।”
प्रशांत किशोर ने मौजूदा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के फैसले पर तंज कसते हुए कहा कि जिस नेता को 202 विधायकों का समर्थन हो, वह पद छोड़कर कभी नहीं जाता है।
पीके ने कहा कि नीतीश की शारीरिक और मानसिक स्थिति ऐसी नहीं है कि वे सीएम पद पर बने रहें। जन सुराज पार्टी ने पहले ही कहा था कि बिहार चुनाव का परिणाम कुछ भी हो, नीतीश कुमार मुख्यमंत्री नहीं रहेंगे। अब रिजल्ट के 3-4 महीने बाद ही वे पद से हट रहे हैं।
प्रशांत किशोर ने कहा, “हमने यह भी भविष्यवाणी की थी कि एनडीए बिहार विधानसभा चुनाव नहीं जीतेगा। अगर चुनाव आयोग और 10-10 हजार वाली योजना का प्रपंच नहीं रचा गया होता, तो एनडीए को सफलता नहीं मिलती।”
उन्होंने आरोप लगाया कि एनडीए की बिहार चुनाव में जीत में चुनाव आयोग और केंद्र में बैठी सरकार के नेताओं की भूमिका है। इसलिए अब केंद्र से तय होगा कि बिहार में सरकार कौन चलाएगा।
पीके ने यह भी दावा किया कि 2014 में जब नरेंद्र मोदी पहली बार देश के प्रधानमंत्री बने थे, तब बिहार से 7-8 लोग गुजरात में जाकर मजदूरी करते थे। आज 2026 में इनकी संख्या 20 लाख तक पहुंच गई है।
उन्होंने कहा, “अब पीएम मोदी का बनाया हुआ सीएम बिहार में बैठेगा, तो गुजरात जाकर मजदूरी करने वाले बिहारियों की संख्या आने 5 सालों में 30-40 लाख तक पहुंच जाएगी। क्योंकि गुजरात की फैक्ट्रियों में 10 से 15 हजार रुपये में काम करने वाले मजदूर सिर्फ बिहार से ही मिलते हैं। बिहार में अगर फैक्ट्रियां नहीं लगेंगी तो यहां के लोग मजबूरन गुजरात जाकर मजदूरी करते रहेंगे। गुजरात के लोग फैक्ट्री के मालिक बने रहेंगे और बिहार के बच्चे वहां मजदूर और दरबान बनेंगे।”

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