राम मंदिर के टॉयलेट में रुपये मिलने के बाद हुआ था चढ़ावा चोरी का खुलासा, 17 घंटे में बरामद हुए थे 81 लाख
राम मंदिर में चढ़ावा चोरी कब से शुरू हुई, इसकी सटीक जानकारी किसी को नहीं है। एसआईटी की जांच इस रहस्य से पर्दा उठा सकती है।
सीसीटीवी कैमरे का रिकार्ड भी मात्र 45 दिन का है, ऐसे में आरोपित ही बता सकते हैं कि उन्होंने मिलकर कितने रुपये पार किए हैं। उनके बयान सहित पुलिस की विवेचना में यह सच सामने आएगा।
चोरी की घटना में पहले बरामद होने वाली धनराशि 40 हजार रुपये थी, जो राम मंदिर के शौचालय से मिली थी। गेट कीपर ने जब बाथरूम में नोटों को देखा, तो उसने फौरन ही ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपतराय को इसकी जानकारी दी। वह मंदिर आए और इसकी सूचना सुरक्षा अधिकारियों के अलावा ट्रस्टियों को भी दी।
इसके अतिरिक्त अनुकल्प मिश्रा, उसके संबंधी लवकुश व नाका निवासी करुणेश के निशानदेही पर अलग-अलग स्थानों से कुल 81 लाख 19 हजार रुपये बरामद किए गये। ट्रस्ट की पहल पर शुरू हुई प्रारंभिक कार्रवाई में चंपतराय, गोपाल राव, डॉ. अनिल मिश्रा सहित जिले के कुछ पुलिस अधिकारी भी शामिल रहे।
इस दौरान उन्होंने मंदिर परिसर नहीं छोड़ा। बताया जा रहा है कि नकेल कसी तो आरोपितों के कुछ अभिभावक अपने पाल्यों को बचाने के लिए चोरी की धनराशि लेकर मंदिर पहुंचे और ट्रस्ट के सुपुर्द की।
यह जानकारी ट्रस्ट के अलावा पुलिस के कुछ अफसरों को भी थी, लेकिन इस बारे में अब तक चंपतराय न तो अधिकृत रूप से बोल रहे हैं और न ही पुलिस अधिकारी।

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